Psychology - Heredity and Environment
Psychology
समावेशी शिक्षा की दृष्टि से निम्नलिखित में से कौन-सी निःशक्त बच्चों की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए ?
Options:
- स्वयं की निःशक्तता से निपटने की आवश्यकता
- उचित निर्देशन एवं परामर्श की आवश्यकता
- दूसरों पर निर्भर रहने की आवश्यकता
- सहायक उपकरणों की आवश्यकता
Right Answer: दूसरों पर निर्भर रहने की आवश्यकता
समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) का मुख्य उद्देश्य सामान्य बच्चों और विशेष आवश्यकता वाले (निःशक्त/दिव्यांग) बच्चों को एक ही छत के नीचे, एक साथ शिक्षा प्रदान करना है। इसका सबसे बड़ा लक्ष्य निःशक्त बच्चों को आत्मनिर्भर (Independent) और सशक्त बनाना है, न कि उन्हें दूसरों पर आश्रित (Dependent) रखना।
आइए अन्य विकल्पों को समझें कि वे निःशक्त बच्चों की आवश्यकताएं क्यों हैं:
(1) स्वयं की निःशक्तता से निपटने की आवश्यकता: समावेशी शिक्षा में बच्चों को यह सिखाया जाता है कि वे अपनी शारीरिक या मानसिक कमियों (निःशक्तता) को स्वीकार करें और आत्मविश्वास के साथ उनका सामना करें। यह उनकी एक बहुत बड़ी मनोवैज्ञानिक आवश्यकता है।
(2) उचित निर्देशन एवं परामर्श की आवश्यकता: निःशक्त बच्चों को सही शैक्षणिक और करियर मार्गदर्शन के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक परामर्श (Counselling) की बहुत आवश्यकता होती है, ताकि वे हीन भावना का शिकार न हों और सही दिशा में आगे बढ़ सकें।
(3) दूसरों पर निर्भर रहने की आवश्यकता (सही उत्तर): शिक्षा का उद्देश्य ही इंसान को स्वावलंबी (Self-reliant) बनाना है। किसी भी दृष्टि से बच्चों को यह नहीं सिखाया जाना चाहिए कि वे अपने जीवन के लिए दूसरों पर निर्भर रहें। इसलिए, यह समावेशी शिक्षा की दृष्टि से कोई आवश्यकता नहीं है।
(4) सहायक उपकरणों की आवश्यकता: दृष्टिबाधित बच्चों के लिए ब्रेल लिपि या ऑडियो बुक्स, श्रवणबाधित बच्चों के लिए हियरिंग एड (Hearing aid), और शारीरिक रूप से अक्षम बच्चों के लिए व्हीलचेयर जैसे सहायक उपकरण (Assistive equipments) उनकी बुनियादी जरूरत हैं। ये उपकरण उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद करते हैं।
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